करना तो बोहोत कुछ चाहते हैं हम भी ,मगरइन जिम्मेदारियों की बेड़ियों में उल्झे इस कदरके अब सुलझ के भी न अब सुलझ पा रहे!
जज़्बात दिल के
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करना तो बोहोत कुछ चाहते हैं हम भी ,मगरइन जिम्मेदारियों की बेड़ियों में उल्झे इस कदरके अब सुलझ के भी न अब सुलझ पा रहे!
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